Life

Live Like A Human

22 Posts

361 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8034 postid : 83

हरियाणा नगरी चौटाला राजा

Posted On: 18 Oct, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

बहुत समय पहले हमारे पाठ्यक्रम में एक कहानी थी, जिसका शीर्षक था “अंधेर नगरी चौपट राजा”! हम में से ज़्यादातर लोग उस काहानी से अवगत होंगे! एक ऐसा राज्य जहां के नियम-क़ानून बिना किसी औचित्य के बनाए गए थे! यदि राज्य में कोई अपराध होता था तो उसकी सजा किसी न किसी को अवश्य मिलती थी तथा इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था की जिसे सजा दी जा रही है वह दोषी है या निर्दोष है! जिसकी वजह से पूरे राज्य में अराजकता का माहौल था तथा जनता में भय व्याप्त था! पिछले दिनों हरियाणा में बढ़ रहे बलात्कार की घटनाओं तथा उन्हें रोकने के लिए खाप के द्वारा दिए गए बयान और चौटाला जी द्वारा उनका समर्थन किये जाने पर यही प्रतीत हो रहा है कि हरियाणा राज्य “अंधेर नगरी” है तथा चौटाला जी वहां के “चौपट राजा” हैं! संभवतः इससे अधिक उपयुक शीर्षक हरियाणा राज्य और चौटाला जी के लिए नहीं होगा! क्योंकि पहले तो आप एक ऐसे अपराध पर लगाम लगाने में नाकाम रहे हैं, जो स्त्री वर्ग के प्रति होने वाला सबसे जघन्य अपराध है! जो कि पूरे राज्य में बढ़ता चला जा रहा है! दूसरे अब आप एक ऐसे कानून को लागू करने का समर्थन कर रहे हैं, जो सम्पूर्ण स्त्री वर्ग के लिए शारीरिक प्रताड़ना का सबब तो बनेगा ही साथ ही उनके शैक्षिक, मानसिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास को अवरुद्ध कर देगा!
खाप की यह राय है कि लड़कियों की विवाह की आयु को घटाकर 15 वर्ष तथा लडको की आयु को 18 वर्ष कर दिया जाये तो इससे बलात्कार की घटनाओं पर लगाम लगाईं जा सकती है! हालांकि समस्त बुद्धिजीवी वर्ग को इस तरह के फैसले में प्रथम दृष्टया ही देश के कानून के प्रति विरोधाभास के साथ ही अनेक खामियाँ नज़र आ रही हैं, किन्तु ऐसी क्या बात है की कई-कई गाँव के लिए न्याय करने वाली खाप पंचायत और राज्य के सर्वाधिक ज़िम्मेदार व्यक्ति चौटाला जी को इसमें खामियों के बजाय बलात्कार की घटनाओं को रोकने की खूबियाँ नज़र आ रही हैं! चलिए खाप पंचायत के सम्बन्ध में तो हम समझ सकते हैं की उसमे शामिल ज़्यादातर लोग अनपढ़, अज्ञानी मर्द हैं, जिन्हें न तो देश के सामान्य ज्ञान की जानकारी है, न ही देश के संविधान और अन्य विधियों की जानकारी है! वे तो अपनी कूढ़ बुद्धि से पशुवत फैसले ले लेते हैं! जिसमे लगभग हर बार स्त्री वर्ग को ही हाशिये पर रखने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है! किन्तु चौपट चौटाला जी ने क्यों इस तरह की राय का समर्थन कर दिया? संभवतः वे बलात्कार की घटनाओं को रोक पाने में नाकाम रहे तो किसी भी उल-जलूल उपाय का समर्थन करके ऐसा जताने की कोशिश की कि वर्तमान नियम-कानूनों में ही कमी है, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं और अगर इन्हें बदल दिया जाए तो सब ठीक हो जाएगा! इसके अलावा शायद उनमे खाप पंचायतों के फैसले का विरोध करने की क्षमता ही न हो क्योंकि इससे उनके वोट बैंक पर बुरा असर पड़ने की भी संभावना हो सकती है और ये बात तो हम सब अच्छी तरह से जान चुके हैं की नेताओं के लिए वोट और सत्ता से बढ़कर कुछ भी नहीं!
अब इस फैसले के पक्ष में दिए गए तर्कों पर तथा अन्य पहलुओं पर नज़र डाल लेते हैं! खाप के महाविद्वानो का कहना है कि वर्तमान समय में बदलते हुए सामाजिक परिवेश और हमारी जीवन शैली की वजह से लड़कियों में साढ़े दस वर्ष की उम्र में तथा लडको में तेरह वर्ष की अवस्था में हार्मोन्स का परिवर्तन होने लगता है, जो उन्हें गलत कदम उठाने के लिए उकसाता है इसलिए ज़्यादातर अविवाहित लड़के-लडकियां ही ऐसी घटनाओं में शामिल रहते हैं! अतः ज़ल्दी से जल्दी विवाह कर देने से उनके इधर-उधर भटकने की संभावना ही नहीं रहेगी!
खाप के इस तर्क का पहला जवाब ये है की यदि हार्मोन्स परिवर्तन की आयु लड़कियों में साढ़े दस और लडको में तेरह वर्ष है तो आपको उनके विवाह की उम्र भी यही रखनी चाहिए! आखिर आपने ये पांच वर्ष की विशेष छूट किस आधार पर दे दी? क्यों आप माँ-बाप को बेवजह पांच वर्षों तक अपने लड़के-लड़कियों की निगरानी और उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उठाने का कष्ट दे रहे हैं? क्योंकि अब सरकार तो किसी काम की रह नहीं गयी, जिससे सुरक्षा और न्याय की उम्मीद की जा सके! इसके अलावा आपकी इस बात का समर्थन तो कोई भी नहीं कर सकता की 15 वर्ष की आयु में लड़कियों और 18 वर्ष की आयु में लड़कों का विवाह कर देने से बलात्कार की घटनाएं लगभग ख़त्म हो जायेंगी! क्योंकि आज के समय में तो पुरुष वर्ग ऐसा वहशी होता चला जा रहा है, जो नवजात बच्चियों और बुज़ुर्ग महिलाओं के साथ ऐसा पाशविक कृत्य करने में भी पीछे नहीं है! गौरतलब है की वर्ष 2010 में 14 वर्ष से 18 वर्ष की आयु की लड़कियों के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाओं का प्रतिशत मात्र 16.1 था! मतलब 15 से 18 वर्ष तक की लड़कियों के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाओं का प्रतिशत लगभग 12-13 ही होगा! चूँकि हमारे देश में वर्तमान में लड़कियों की विवाह की आयु 18 वर्ष निर्धारित है इसलिए 18 वर्ष से अधिक आयु की लड़कियों के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाओं तथा 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाओं पर तो आपके फैसले से कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है! यानी की अगर मान लिया जाए की 15 वर्ष में लड़की की शादी कर देने से कुछ लड़कियां बलात्कार का शिकार होने से बच जायेंगी तो भी लगभग 87-88 प्रतिशत बलात्कार की घटनाओं पर इस फैसले से कोई भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला क्योंकि वे घटनाएं 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों और 18 वर्ष से अधिक वर्ष की लड़कियों और स्त्रियों के साथ होती हैं!
रही बात लड़कों के जल्दी विवाह करने और बलात्कार की घटनाओं को अंजाम न देने के तर्क की! तो हम सभी इस बात से भी अवगत हैं, की बलात्कार को अंजाम देने वाले पुरुष वर्ग में 15 -16 वर्ष की आयु के किशोर से लेकर 50 -60 वर्ष की आयु तक के वृद्ध भी शामिल रहते हैं तथा उनमे से अधिकतर लोग बलात्कार इसलिए नहीं करते क्योंकि वे अविवाहित हैं! बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें सही-गलत से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें एक से अधिक लोगों के साथ सम्बन्ध बनाने में ज्यादा मज़ा आता है, क्योंकि वे बदलते हुए परिवेश में कुंठित मानसिकता से ग्रस्त होते चले जा रहे हैं! इसके अलावा एक बड़ा कारण यह भी है की उन सबके ह्रदय से कानून का भय समाप्त होता जा है! इसके अलावा बात रही 18 वर्ष के किशोर के विवाह करने और घर-गृहस्ती को चलाने की, तो जब आज के युग में 25 -30 वर्ष के युवक बेरोज़गारी से ग्रस्त रहते हैं, तब भला 18 वर्ष का किशोर कौन से जतन करके अपना परिवार चलाएगा! इसका परिणाम यह होगा की लड़कियों का विवाह तो 15 वर्ष की आयु में होगा किन्तु किसी 25 -30 वर्ष के काम-धंधे या नौकरी करने वाले पुरुष से, क्योंकि कोई माँ-बाप अपनी लड़की का विवाह ऐसे लड़के से कभी नहीं करेंगे जिसके भविष्य के बारे में वे आश्वस्त न हो! ले-दे कर इस व्यवस्था का शिकार सिर्फ और सिर्फ स्त्री वर्ग ही होगा! जो वापस उसे उस मुगलकालीन दासता की ओर ले जाएगा, जहां उसे शिक्षा ग्रहण करने और अपने पैरों पर खड़े होने का अधिकार नहीं होगा! क्योंकि 30 वर्ष का पति नहीं चाहेगा की उसकी 15 वर्षीय पत्नी अन्य पुरुषों के संपर्क में आये!
अब बात खाप और चौटाला जी की कि क्यों वे हमेशा स्त्री वर्ग को ही अपने निर्णयों का शिकार बनाते रहते हैं! कुछ समय पहले खाप ने समाज में फैलती अश्लीलता को कम करने के लिए लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर प्रतिबन्ध लगाने का आदेश दिया था! जबकि जींस पहनने से तो लड़की के पैर अच्छे से ढक जाते हैं और मोबाइल की उपयोगिता और आवश्यकता पड़ने पर उसके काम आने की खूबियाँ किसी को बताने की आवश्यकता ही नहीं! मुसीबत में पड़ी लड़की इसका उपयोग अपने बचाव के लिए कर सकती है! मोबाइल के गलत प्रयोग से कही अधिक उसका सदुपयोग होता है! लेकिन ये खाप और चौटाला जैसे लोग बिना सोचे समझे स्त्री वर्ग को अपने घटिया फरमान सुना देते हैं!
यदि आप को प्रतिबन्ध लगाना ही है तो अश्लील सिनेमा पर प्रतिबन्ध लगाइए, घटिया लोगो पर प्रतिबन्ध लगाइए, सेंसर बोर्ड का विरोध करिए, जो लोग सरे-आम लड़कियों को छेड़ते हैं उन्हें कठोर सजा दीजिये, बलात्कार करने वाले पुरुष को जेल की कोठरी तक पहुंचाइये! आप ये सब करने में असमर्थ है क्या? क्या आपके नियम-कानून सिर्फ लड़कियों पर ही लागू होते हैं? क्या बलात्कार करने वाले पुरुष आपसे अधिक शक्तिशाली हैं? या आप स्वयं मर्द प्रजाति के होने के कारण मर्दों पर अंकुश नहीं लगाना चाहते? क्या स्त्री वर्ग आपकी नजरो में इंसान नहीं, जिसे हमेशा आप अपनी दासी और भोग की वस्तु के रूप में देखते हैं! हमारे पूरे समाज की सोंच पुरुष प्रधान हो चुकी है, जब किसी स्त्री के साथ कोई पुरुष बलात्कार करता है, तब लड़की बहुत दूर-दूर तक बदनाम हो जाती है और उसे हेय दृष्टि से देखा जाने लगता है जबकि पुरुष अगर सजा पा भी जाता है तो वापस समाज में लौटने के बाद भी उसकी साख में कोई कमी नहीं होती! क्योंकि हमारे समाज में इज्ज़त का ठेका सिर्फ स्त्रियों के पास है! किसी स्त्री का पति अगर दूसरी स्त्री से बलात्कार करे तो पत्नी अपने पति के बचाव में खड़ी दिखाई देती है, किसी माँ का लाडला ऐसा करे तो माँ बचाव में खड़ी दिखाई देती है! यहाँ तो स्वयं स्त्रियों की नजरो में एक स्त्री की इज्ज़त से बढ़कर उसका कुकर्म करने वाला पति, लड़का या भाई होता है! जब तक ऐसा चलता रहेगा, समाज में यह घटनाएं बढती ही रहेंगी! एक अन्य बात यह भी की भारत देश में और भी बहुत से राज्य हैं, जिनमे से कुछ में बलात्कार की घटनाएं अधिक होती हैं और कुछ में बहुत कम! इसका कारण यही है की कुछ राज्यों का सामाजिक वातावरण बहुत गिरे हुए स्तर पर पहुँच चुका है क्योंकि वहां की क़ानून व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है की वह अपराधियों पर अंकुश लगाने और उन्हें सजा देने में लगभग नाकाम सी हो चुकी है!
खाप को संक्षिप्त में एक सुझाव देना चाहुंगा की यदि वे स्त्री की इज्ज़त बचाने के लिए उसके स्वतंत्रता पूर्ण, स्वाभिमान पूर्ण एवं आत्म निर्भर जीवन पर प्रतिबन्ध लगा रहे हैं,(जिससे की बलात्कार की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं) तो स्त्री ऐसे पशु सामान जीवन का क्या करेगी! आप उसे हमेशा अपनी दासी और भोग की वस्तु के समान समझेंगे! इससे अच्छा तो यही होगा की स्त्री वर्ग को आप समाप्त करने का फरमान सुना दीजिये (क्योंकि आपकी नज़रों में देश के क़ानून की कोई अहमियत नहीं और कानून तो सिर्फ वो है जो आप कहें) या स्त्री वर्ग स्वयं अपने को समाप्त कर ले! न लड़कियां होंगी न उनके साथ बलात्कार होंगे और फिर एक दिन ऐसा आएगा की बलात्कार को अंजाम देने वाले वर्ग का भी नामोनिशान मिट जाएगा!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
12/11/2012

प्रिय अनिल जी,आपको सर्वप्रथम पुरुष-प्रधान इस समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक ,पुरजोर आवाज उठाने हेतु वधाई एवं आपको दीपाबली की समस्त मंगलमय शुभ -कामनाएं … सुषमा गुप्ता

deepasingh के द्वारा
31/10/2012

वन्देमातरम अनिल जी. शासन हो या प्रशासन पुलिस हो या खाप ये सब अपनी कमियों को छुपाने के लिए उलटा महिलाओं पर ही प्रतिबन्ध लगाते हैं क्योकि ये तो अपराधो रो रोकने से गये.सम्पूर्ण रूप से उत्तम लेख.महिलाओं की तरफ से आप खूब आवाज़ उठाते हैं.वृद्ध विधवा महिलाओं पर मेरी पोस्ट पढियेगा.वन्देमातरम.

अनिल जी बहुत ही अच्छी सार्थक प्रस्तुति सार्थक आलेख की बधाई ,,,,,,,,,,,यदि आप को प्रतिबन्ध लगाना ही है तो अश्लील सिनेमा पर प्रतिबन्ध लगाइए, घटिया लोगो पर प्रतिबन्ध लगाइए, सेंसर बोर्ड का विरोध करिए, जो लोग सरे-आम लड़कियों को छेड़ते हैं उन्हें कठोर सजा दीजिये, बलात्कार करने वाले पुरुष को जेल की कोठरी तक पहुंचाइये! आप ये सब करने में असमर्थ है क्या? क्या आपके नियम-कानून सिर्फ लड़कियों पर ही लागू होते हैं? क्या बलात्कार करने वाले पुरुष आपसे अधिक शक्तिशाली हैं? या आप स्वयं मर्द प्रजाति के होने के कारण मर्दों पर अंकुश नहीं लगाना चाहते? क्या स्त्री वर्ग आपकी नजरो में इंसान नहीं, जिसे हमेशा आप अपनी दासी और भोग की वस्तु के रूप में देखते हैं! हमारे पूरे समाज की सोंच पुरुष प्रधान हो चुकी है,

Ravindra K Kapoor के द्वारा
21/10/2012

अनिलजी बहूत ही सुन्दर लेख है आपका समस्या को लगभग सभी पहलुओं से आपने देखने की कोशिस की है. आपकी सभी बातों से सभी सहमत होंगे पर इस बात से कोई भी इन्कार नहीं कर सकता कि देश में बढ़ते अपराधों का मूल कारण जैसा कि आपने लिखा भी है ‘एक बड़ा कारण यह भी है की उन सबके ह्रदय से कानून का भय समाप्त होता जा है’ बस मैं इतना और जोड़ दूंगा कि भय समाप्त होता नहीं जा रहा है बल्कि समाप्त हो चूका है. समाज कि ये दशा आने वाली भयानक स्थितियों का पूर्वाभास है. सुभकामनाओं के साथ …Ravindra K Kapoor

MAHIMA SHREE के द्वारा
19/10/2012

समीर जी नमस्कार बहुत -२ बधाई … आपने समस्या के हर बिंदु को छुआ और और तर्कपूर्ण और देशी तालिबानी संस्करण खाप के मूर्खतापूर्ण रवैया और चौटाला का वोट बैंक की खातिर किये गए असंवेदनशील समर्थन की सही झाड लगाई … जरुरी है की हरियाणा तथा अन्य प्रान्तों में नैतिक मूल्यों की स्तापना . कानून का कड़ाई से पालन तथा बच्चियों को वयस्क होने तक हर तरह की शिक्षा दे कर उन्हें मजबूत बनाया जाए … ताकि शादी के बाद भी किसी भी तरह की समस्या का सामना कर सके … ये बाल विवाह की बात करते है … अभी तो अरबो की जनसँख्या काबू में ही नहीं आरही .. लोगो को रहने खाने , कमाने के लाले पर रहे है …..जिसकी वजह से हाजारो समस्याए रोज मुंह बाए खड़ी है …. उससे निपटने के बजाये इनको देखो … क्या बक रहे … लग रहा है अब पाप का घड़ा भरने वाला है .. ये सारे … अकाल मृत्यु को जायेगे …… मेरी तो यही इच्छा है ……. पुनह बधाई आपको

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    बहुत बहुत शुक्रिया महिमा जी, देखा जाए तो अकाल मृत्यु इनके लिए सजा के रूप में कुछ भी नहीं हैं, इन सबको तो उन प्रतिबंधों में जीवन गुजारने की सजा देनी चाहिए जो ये स्त्रियों पर लगाते चले आये हैं! साथ ही इनसे वो सारे काम करवाने चाहिए जो एक स्त्री घर और बाहर करती है! इनके साथ वही व्यवहार होना चाहिए जो ये अपनी पत्नी-बहू-बेटियों के साथ करते चले आये हैं!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
19/10/2012

सवाल उम्र का नहीं, अपराध कैसे घटें ये जरूरी है. बधाई लेख हेतु.

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    यही तो बात है प्रदीप जी…. की अपराध कैसे घटें? क्या विवाह के लिए उम्र घटाने से ये रुक जायेंगे? अगर ऐसा हो सकता है, तब तो मेरा तथ्यपरक, विचारपूर्ण लेख व्यर्थ है!

sudhajaiswal के द्वारा
19/10/2012

आदरणीय अनिल जी, बहुत सही आकलन सामाजिक स्थिति का, अच्छे लेख के लिए बहुत बधाई|

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सुधा जी

shashibhushan1959 के द्वारा
18/10/2012

आदरणीय समीर जी, सादर ! खाप पंचायतों के ऐसे विचार सर्वथा व्यर्थ हैं ! न तो ये कारगर हैं न लागू होने वाले हैं ! सादर !

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, आपकी बात सही है, लेकिन आपने मेरे लेख के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, मेरा लेख पसंद नहीं आया क्या आपको?

    shashibhushan1959 के द्वारा
    21/10/2012

    आदरणीय अनिल जी, सादर ! आपके लेख पर ही मैंने प्रतिक्रिया दी है ! विस्तृत प्रतिक्रिया थोड़ी कडवी हो जायेगी जो शायद आपको अच्छी नहीं लगेगी !

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    21/10/2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर, मैं यह मानता हूँ की हमें यह जीवन दूसरों का मनोरंजन करने के लिए नहीं प्राप्त हुआ है, यदि आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया में मुझे मेरे या मेरे लेख के बारे में कोई उचित नकारात्मक बात मालूम पड़ेगी तो मैं उसे दूर करूँगा, लेकिन यदि वह बात मुझे उचित नहीं लगी, तो आपको उसका उत्तर दूंगा, आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया के इंतज़ार में……

nishamittal के द्वारा
18/10/2012

विचारपूर्ण आलेख पर बधाई आपको समीर जी.

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    शुक्रिया निशा जी आपको यह लेख विचारपूर्ण लगा!

bhanuprakashsharma के द्वारा
18/10/2012

बहुत खूब, समाज को आइना दिखाता सुंदर आलेख। बधाई।  

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    कोशिश तो यही है मेरी की समाज आईने को देखे भी और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को भी अहमियत दे, बहुत बहुत शुक्रिया

Madan Mohan saxena के द्वारा
18/10/2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
    19/10/2012

    इतनी अधिक तारीफ़ के काबिल तो नहीं मैं, फिर भी बहुत बहुत शुक्रिया मदन मोहन जी


topic of the week



latest from jagran