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बलात्कारियों को फांसी नहीं होनी चाहिए!

Posted On: 20 Dec, 2012 में

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don't rapeपिछले दिनों दिल्ली शहर में हुए वहशी सामूहिक बलात्कार और उसमे पीड़ित लड़की की दयनीय स्थिति हो जाने के बाद दिल्ली ही नहीं पूरे देश में जोर-शोर से उस घटना का विरोध और बलात्कारियों को फांसी की सजा दिए जाने की बात का समर्थन हो रहा है! पिछले तीन दिन से समाचार चैनलों पर उस घटना के अलावा किसी घटना का प्रसारण नहीं हो रहा है, राजनीतिक हलको और संसद, विधानसभाओं में भी यही मुद्दा लेकर बवाल हो रहा है! सभी बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा मांग रहे हैं! ऐसा प्रतीत हो रहा है की ऐसी वहशी घटना पूरे भारत में पहली बार घटी है तथा इसके पहले ऐसा कुछ कभी होता ही नहीं था! नेता लोगों में से कोई उस लड़की की चिकित्सा का खर्च उठा रहा है कोई उसे नौकरी देने की बात कह रहा है और भी न जाने क्या-क्या? देखा जाए तो सभी समाचार चैनल और नेता लोग देश में इस घटना के विरोध में बहने वाली गंगा में अपने हाँथ धोने में लगे हैं……शायद यही इस देश का असली चरित्र हो चुका है की दुसरे के दुःख से यदि अपना सुख होने के संभावना है तो उसे उठा लेना चाहिए!
ऐसा नहीं है की मुझे इस बलात्कार की घटना से दुःख नहीं हुआ, बहुत दुःख हुआ और रोज़ ऐसी घटना पढ़कर रोज़ दुःख होता है! क़ानून व्यवस्था पर गुस्सा भी बहुत आता है! महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसाओ और खासकर घरेलु हिंसा के विषय पर शोध भी कर रहा हूँ! मुझे यह समझ में नहीं आता की बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा मांगने वाले सिर्फ दिखावा कर रहे हैं या उनमे बुद्धिजीवी व्यक्तियों की कमी है! आज जनता तो हवा के रुख के साथ-साथ बह रही है उसे नहीं पता कि बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान होने के कितने बुरे परिणाम हो सकते हैं! इसका सबसे बुरा परिणाम उल्टा बलात्कार का शिकार होने वाली महिला को ही बनना पड़ेगा, उसे इस सजा की कीमत अपने जान गवां कर चुकाने पड़ेगी!
बलात्कार करने वाला व्यक्ति उस स्त्री को बलात्कार करने के बाद मौत के घाट उतार देगा, इसके दो कारण हैं-
पहला यह की वह सजा से बचने के लिए सारे सबूत और गवाह को नष्ट करना चाहेगा जो की ज़्यादातर अपराध करने के बाद अपराधी करते हैं, और बलात्कार के मामले में सबसे बड़ा गवाह पीड़ित लड़की खुद होगी!
दूसरा यह की जब बलात्कार की सजा फांसी होगी तथा बलात्कार के साथ हत्या करने की सजा भी फांसी ही होगी, तो फिर अपराधी तो अपनी सुरक्षा के लिए पीड़ित की हत्या ज़रूर करेगा, क्योंकि इससे उसके बचने की संभावना बढ़ जायेगी और अगर पकड़ा भी गया तो उसे अधिक से अधिक फांसी ही होगी, जो उसके बलात्कार की ही सजा से बढ़कर नहीं होगी!
गौरतलब बात यह है की भारत में 75 प्रतिशत से ज्यादा बलात्कार के अभियुक्त बाइज्ज़त बरी हो जाते हैं, ऐसा हमारी क़ानून और न्याय-व्यवस्था की खामियों के चलते होता है! ऐसे में हमें ज़रुरत सिर्फ इस बात की है की पुलिस-प्रशाशन औरतों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था करे,और फिर भी कभी यदि ऐसी घटनाएं होती हैं तो पुलिस तथा न्यायपालिका अपराधी के लिए निश्चित रूप से दंड की व्यवस्था करे! ताकि अपराधियों में क़ानून का भय व्याप्त हो सके !
मेरा तो यही मानना है की कठोर दंड की ज़रुरत है किन्तु उससे भी अधिक ज़रुरत हमें कानून के उचित क्रियान्वयन की है!
किन्तु उपरोक्त समस्त व्यवस्थाये दुसरे स्तर पर करने की ज़रुरत पड़ेगी,
जब तक प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक परिवार के द्वारा अपने लडको को ये चेतावनी नहीं दी जायेगी की अगर वे ऐसी किसी भी गतिविधि में संलिप्त पाए गए या लड़कियों से छेड़छाड़ की तो उनके लिए घर के दरवाज़े हमेशा के लिए बंद कर दिए जायेंगे! तब तक ये घटनाएं कम नहीं होने वाली!

अधिक वक्त न होने की वजह से अधिक गहराई तक नहीं जा रहा किन्तु आशा है मेरा आशय आप तक अवश्य पहुंचेगा!
जय हिन्द!

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
13/02/2013

प्रिय अनिल जी, यदि आपकी बात से सहमती व्यक्त की जाए कि बलात्कारी को फांसी नहीं दी जाए , तो आप ही सुझाव भी दीजिये कि जिस कड़ी सजा कि आप बात कर रहें है, उसका प्रारूप क्या होगा…मेरा भी विचार यही है कि यदि फांसी नहीं, तो कम से कम उनको नपुंसकता तो देनी ही चाहिए ,जिससे वेखौफ अपराधियों में भय की अनुभूति होगी…धन्यबाद .


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